लखनऊ। महज 10 साल की उम्र में बीएससी। चौकिए मत। यह कारनामा उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में रहने वाली सुषमा वर्मा का है। सुषमा पहले भी यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में अपना सिक्का जमा चुकी है। वह अब उच्च शिक्षा से कदम ताल मिलाने चल पड़ी है। सुषमा ने बीएससी बायोलॉजी में प्रवेश के लिए सीएमएस डिग्री कॉलेज में आवेदन किया था। उसके इस हौसले को आखिरकार लखनऊ विश्वविद्यालय ने भी सलाम किया है। मंगलवार को हुई प्रवेश समिति की बैठक में सुषमा के प्रवेश को हरी झंडी दे दी गई।
मात्र 7 वर्ष 3 महीने की उम्र में वर्ष 2007 में यूपी बोर्ड से हाईस्कूल परीक्षा उत्तीर्ण करके सुषमा ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। इसके लिए उसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दर्ज है।
इसके बाद वर्ष 2010 में 10 वर्ष की उम्र में सुषमा ने इंटरमीडिएट बोर्ड की परीक्षा भी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। बीएससी में प्रवेश के लिए सुषमा की उम्र आड़े आ रही थी। उसकी अद्भुत प्रतिभा को देखते हुए सीएमएस डिग्री कॉलेज ने सुषमा का प्रवेश अपने यहां बीएससी बायोलॉजी में करने की इच्छा जताई थी। कॉलेज ने लविवि को पत्र लिखकर प्रवेश के लिए अनुमति मांगी थी। लविवि प्रवेश समिति ने मंगलवार को सुषमा का प्रवेश करने की अनुमति दे दी।
उम्मीद है बेहतर करूंगी
एलडीए कॉलोनी, कानपुर रोड में रहने वाले एक निजी स्कूल में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी तेज बहादुर वर्मा व छाया देवी की छोटी संतान सुषमा के सपनों को लविवि के फैसले ने और हौसला दिया है। सुषमा कहती है कि मैंने जुलोजी, बॉटनी और केमेस्ट्री का ग्रुप चुना है। मुझे उम्मीद है कि मैं इसमें भी बाकी कक्षाओं की तरह बेहतर करूंगी। हालांकि सुषमा के ख्वाब पर उम्र भारी पड़ रही है। बकौल, सुषमा मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं लेकिन उम्र कम होने के कारण सीपीएमटी में मेरी कॉपियां नहीं जंची। सुषमा कहती है कि पढ़ाई के लिए मेरा कोई समय तय नहीं है। जब इच्छा करती है तब पढ़ाई करती हूं।
भाई भी कर चुका है कमाल
कम उम्र में बड़ी डिग्री करने का कमाल सुषमा से पहले उसका भाई शैलेन्द्र भी कर चुका है। शैलेन्द्र ने मात्र 14 वर्ष की उम्र में वर्ष 2007 से लखनऊ विश्वविद्यालय से बीसीए की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद उसने एमसीए में भी प्रवेश लिया था लेकिन पढ़ाई जारी नहीं रख सका। शैलेन्द्र इस समय घर पर ही रहकर अध्ययन कर रहा है।
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