Wednesday, December 29, 2010

बच्चे खोकर भी आर्चरी के लिए जिंदा हैं पिता

लेनिन की मौत के डेढ़ महीने बाद पिता सत्यनारायण ने मांगी राष्ट्रीय चैंपियनशिप की मेजबानी
नई दिल्ली। लेनिन की मौत उन पर कहर बनकर टूटी। कोई और होता तो बिखर जाता। आखिर पहले तीरंदाज बेटी गई और उसके बाद जवान बेटा असमय काल के मुंह में समा गया। लेकिन शारीरिक और मानसिक रूप से टूट चुके पिता सत्यनारायण ने बेटे की मौत के डेढ़ माह बाद नेशनल चैंपियनशिप की मेजबानी लेकर तीरंदाजी को जीवन बनाने का निर्णय ले डाला। वह यह चैंपियनशिप लेनिन की याद में विजयवाड़ा स्थित अपनी एकेडमी में कराने जा रहे हैं। इसका सारा खर्च वह अपनी जेब से भरेंगे।
सिर्फ यही नहीं बेटी की मौत के बाद उसके नाम पर शुरू की गई वोल्गा एकेडमी को भी वह बंद नहीं कर रहे, बल्कि लेनिन के नाम की प्रॉपर्टी बेचकर वह इसे नई ऊंचाइयां देने जा रहे हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत जीतने वाले रितुल चटर्जी और चिरंजीवी यमुना स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में चल रही जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में जब तक निशाना लगाते रहे। उनके पीछे सत्यनारायण चेरुकुरी और उनकी पत्नी कृष्णा कुमारी बिना कुछ बोले टकटकी लगाए उनका प्रदर्शन निहारते रहे। लेनिन की बात छिड़ते ही उनकी आंखों से आंसुओं की धाराएं बह निकलीं। कुछ मिनट बाद उनके मुंह से यही निकला लेनिन का सपना पूरा करना है। लंदन ओलंपिक और उसके बाद 2016 रियो डि जेनेरियो ओलंपिक में इस एकेडमी के बच्चे भारतीय टीम में शामिल कराने हैं। बस इसी लक्ष्य के सहारे बाकी की जिंदगी गुजार दूंगा। वह अब एकेडमी के 80 बच्चों को उच्चस्तरीय कोचिंग देने के लिए अमेरिका की रॉबिनहुड एकेडमी के कोच नेटी वी जेम्स को बुलाने जा रहे हैं। कंपाउंड के बाद अब एकेडमी में रीकर्व की ट्रेनिंग भी वह शुरू कराएंगे। इसके लिए भी वह विदेशी कोच बुलवाएंगे।

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