दिलवालों की दिल्ली आजकल अपने लाल परिमार्जन नेगी की सफलता पर इतरा रही है। शतरंज का यह युवा राष्ट्रीय चैंपियन रूस के खांती मिनसिस्क शहर में होने वाले विश्व कप में अपनी जगह पक्की करने वाला पहला भारतीय खिलाड़ी बन गया है। इस वर्ष के अर्जुन पुरस्कार सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित 17 वर्षीय परिमार्जन शतरंज के सबसे युवा ग्रेंडमास्टर भी हैं। परिमार्जन का जन्म नौ फरवरी, 1993 को उत्तराखंड में हुआ, पर जल्दी ही पूरा परिवार दिल्ली आकर बस गया। उनकी मां एलआईसी में प्रबंधक का पद संभाल रही हैं, तो पिता हवाई यातायात नियंत्रक हैं। बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के परिमार्जन ने महज चार वर्ष की उम्र में ही शतरंज के घोड़े दौड़ाने शुरू कर दिए थे। उनकी प्रतिभा को देखकर कक्षा तीन से ही उन्हें दो लाख रुपये सालाना दिए जा रहे हैं, बल्कि उनकी शिक्षा भी नि:शुल्क है।
परिमार्जन को पहली अंतरराष्ट्रीय कामयाबी 2002 में मिली, जब तेहरान में आयोजित अंडर-10 एशियन चैंपियनशिप में उन्होंने भारत का परचम लहराया। इसके बाद उनके लिए सफलता की सीढ़ी चढ़ना आसान हो गया। जुलाई, 2005 में स्पेन में आयोजित इंटरनेशनल ओपन जीतकर वे दुनिया के सबसे युवा इंटरनेशनल मास्टर बनने में सफल हुए, तो इसके ठीक एक साल बाद एक जुलाई, 2006 को रूसी ग्रेंडमास्टर रसलेन शेरबाखोब से ड्रॉ खेलकर उन्होंने देश का सबसे युवा ग्रेंडमास्टर बनने में कामयाबी पाई।
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