उस समय मेरे पास सिर्फ 14 हजार रुपये थे। ये मैंने गर्मी की छुट्टियों में पार्ट टाइम नौकरी कर बचाए थे। इसके अलावा दो कंप्यूटर थे, जो किराए पर लिए थे। यकीन नहीं होता, इस पूंजी से करीब दस साल के भीतर देश की सबसे बड़ी डिजिटल मीडिया कंपनी खड़ी हो गई। सफलता की अपनी कहानी बयां करते हुए मैग्नॉन सॉल्यूशंस के संस्थापक व सीओओ विनीत वाजपेयी फूले नहीं समाते हैं। महज 33 साल के इस युवा की कहानी जल्द ही लोगों के सामने होगी। विनीत अपने जीवन के सभी संघर्षो व अनुभवों को किताब द स्ट्रीट टू द हाईवे में पिरोने जा रहे हैं। वाजपेयी ने बताया कि जब उन्होंने कारोबार शुरू किया था, तब यह बताने वाला कोई नहीं था कि क्या सही है और क्या गलत। काम करते-करते सब सीखा। कई बार ऐसी गलतियां भी हुई, जिनसे झटका लगा। यह किताब उन लोगों के लिए है, जो कारोबार में सफलता का सपना देखते हैं। विनीत ने 22 साल के कॉलेज से निकले छात्र के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। आज की तारीख में मैग्नॉन सॉल्यूशंस के ग्राहकों में कई बड़ी भारतीय कंपनियां शुमार हैं। इनमें भारती एयरटेल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचसीएल, मारुति और टीसीएस भी शामिल हैं। दुनिया भर के 14 देशों में उसके ग्राहकों में 600 से अधिक कंपनियां हैं। इस कंपनी की शुरुआत दो कंप्यूटर के साथ एक छोटे से जेनरेटर रूम से हुई थी जो एक बिल्डिंग के टॉप फ्लोर पर स्थित था। आज इस कंपनी में 150 कर्मचारी हैं और दिल्ली के अलावा मुंबई में भी इसका ऑफिस है। साथ ही विनीत लंदन में भी एक ऑफिस बनाने की प्रक्रिया में हैं।
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