Friday, January 28, 2011

नक्सल इलाकों में लोगों को भोज कराकर जोड़ रही पुलिस


बिहार के औरंगाबाद में नक्सलियों के खिलाफ पुलिस गांधीगीरी पर उतर आई है। नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस द्वारा एक रणनीति के तहत ग्रामीणों को सामूहिक भोज कराया जा रहा है। पुलिस को इसका फायदा मिलता दिख रहा है और ग्रामीण उसके साथ जुड़ते जा रहे हैं। नक्सलवाद के सफाए के लिए उसने एक अनूठे प्रयोग की शुरुआत की है। पुलिस की यह मुहिम घोर नक्सल प्रभावित टंडवा थाने के बेला गांव से शनिवार को शुरू हुई। इसके तहत इलाके में पुलिस ग्रामीणों को न सिर्फ सामूहिक भोज करा रही है बल्कि उनके दुख-दर्द भी सुन रही है। गांवों में ढोल बजा उत्सव का माहौल कायम कर वह ग्रामीणों का इस सुधार आंदोलन में साथ देने का आह्वान कर रही है। लाल आतंक से सहमे ग्रामीणों ने जब टंडवा में आयोजित भोज में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया तो पुलिस का हौसला बढ़ा। रविवार को ढिबरा थाना क्षेत्र के तेंदुई गांव में भी ग्रामीणों को सामूहिक भोज कराया गया। जब यहां भी ग्रामीणों ने काफी संख्या में हिस्सा लिया तो एसपी विवेकराज सिंह ने जिले के सभी नक्सल प्रभावित थाना क्षेत्रों में ऐसे आयोजन कराने की योजना बनाई। इस बाबत थानाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है। एसपी ने कहा कि ग्रामीण लाचारी में नक्सलियों का साथ देते हैं। अगर पुलिस का नमक खाएंगे, तो नक्सल क्षेत्रों के ग्रामीण अवश्य उसके मददगार बनेंगे। सामुदायिक पुलिसिंग योजना के तहत ग्रामीणों के शादी-विवाह में पुलिस मदद कर रही है। बर्तन के साथ-साथ नि:शुल्क टेंट उपलब्ध कराती है। मगध रेंज के डीआईजी जितेंद्र कुमार कहते हैं कि इस बदलाव में कड़ी बनी राज्य सरकार की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है। सामूहिक भोज का यह प्रयोग माओवाद की उठती लपटों को अवश्य कम करेगा।

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