Monday, March 7, 2011

महिला किसान ने हल चला कर उतारा 6 लाख का कर्ज


 पीलीभीत जिले के रमनगरा निवासी महिला किसान क्षिप्रा विश्वास का संघर्ष किसी हिंदी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। क्षिप्रा के परिवार पर नौ लाख का कर्ज था, जिसे चुकाने के लिए उसने हाड़तोड़ मेहनत की और छह लाख का कर्जा चुका दिया। जिले के रमनगरा निवासी नारायण विश्वास ने कई साल पहले सात एकड़ में मिर्च की खेती की। फसल ठीक न होने से लाभ तो दूर रहा नौ लाख का कर्ज चढ़ गया, जिससे नारायण टूट गया। ऐसे समय उसकी पत्‍‌नी क्षिप्रा विश्वास ने दम दिखाया और खेती की बागड़ोर खुद संभाल ली। इसी बीच आक्सफेम की सहायता से विनोबा सेवा आश्रम ने महिला किसानों की सहायता के लिए स्वाति परियोजना आरंभ की। क्षिप्रा इस योजना से जुड़ी और शाक-भाजी उत्पादन की तकनीक तथा विपणन की जानकारी लेने के बाद बैंक से कर्ज लेकर खेती शुरू की। क्षिप्रा ने चार एकड़ के अपने खेत में परंपरागत फसल को छोड़ मिर्च, हल्दी, बैंगन, परवल, तथा शिमला मिर्च की खेती की। खुद हल चलाने वाली क्षिप्रा अब हर सीजन में सब्जी उत्पादन से पचास हजार से लेकर एक लाख रुपये तक का लाभ कमा रही है। वह स्वयं अपनी फसल की बिक्री के लिए दिल्ली की आजादपुर और ओखला मंडी में जाती है। मेहनत का ही नतीजा है कि उसने न सिर्फ परिवार का भरण पोषण किया बल्कि नौ लाख रुपये में से छह लाख का कर्ज भी उतार दिया। क्षिप्रा को देख रमनगरा की कई अन्य महिला किसानों ने भी सब्जी उत्पादन आरंभ कर दिया। स्वाति परियोजना के समन्वयक सुरेश तिवारी बताते हैं कि परियोजना ने रमनगरा तथा गभिया सहराई क्षेत्र के महिला किसानों में एक जागरुकता लायी है। वर्तमान समय में परियोजना से तकरीबन एक हजार महिला किसान जुड़ी हैं। स्वाती परियोजना के पर्यवेक्षक मुकुंद के अनुसार क्षिप्रा तथा उसका परिवार 24 घंटे में 12 घंटे खेतों में जुटा रहता है। यही उनकी सफलता का राज है

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